यहाँ सब कोई अपना रोल ठीक तरह से निभा रहा हैं ।

पिछले दिनों मैं पटना गया था वहाँ से आते वक़्त मैं पूर्वा एक्सप्रेस में सवार हुआ तो मेरे साथ वाले कूपे में  कुछ बुजुर्ग महिलाएं भी सवार हुई।बाद में  पता चला कि वो सारी महिलाएं माउंट अबु जा रही थी क्यूंकि वहाँ प्रजापति ब्रह्म कुमारी के किसी कर्यक्रम में उन्हें वहाँ १० दिनों का प्रवास करना था। सुबह में उनमें से एक महिला ने २ पेजों का एक छपा हुआ सन्देश पढने लगी बाकि महिलाएं उसको सुन रही थी ।जिज्ञासा करने पे पता चला कि ये माउंट अबु से ही हर रोज आता हैं और इसे मुरली कहते हैं ।
आगे बातों बातों में उन लोगों ने बताया कि हर आत्मां एक दूसरे से किसी न किसी तरह एक रिश्ता रखती हैं और इसी लिए अगर कोई किसी को मदद करता हैं तो इसका मतलब हैंकि पहले किसी और जन्म  में मदद पाने वाली आत्मा ने भी मदद देने वालीं आत्मा को मदद पहुँचाया होगा ।इसी तरह अगर कोई किसी को नुकसान पहुँचता हैं तो इसका मतलब हैं कि नुकसान पहुचाने वाली आत्मा किसी न किसी जन्म में इस आत्मा के द्वारा नुकसान पहुचाई गयी हैं ।और इसी लिए सारी आत्माएँ  या तो बदला ले रही हैं या एहसान उतार  रही हैं ।
उनका मानना हैं कि यहाँ  नाटक एकदम परफेक्ट चल रहा हैं और सारी आत्माएँ अपना किरदार बहुत पेरफेक्टली निभा रही हैं ।इसी लिए किसी को बहुत ज्यादा नहीं सोचना चाहिए क्यूंकि सोच के भी इस स्क्रिप्ट में कोई कुछ भी बदलाव नहीं ला सकता।ये स्क्रिप्ट पहले से निश्चित हैं ।
सुन के अज़ीब लगा लेकिन पता नहीं ऐसा होता हैं कि नहीं ये में निश्चय नहीं कर पाया ।
क्या हम वाकई में अध्यात्मिक लोग हैं?

हमारा देश भी अज़ीब हैं|यहाँ जिसे देखो जल्दी से जल्दी अमीर बनने कि जुगत में लगा हुआ हैं |यहाँ आये दिन सुनने में आता हैं कि पैसे के लिए कुछ अलग ही हो रहा हैं|

जैसे कि  रातों रात कद्दू को बड़ा करने के लिए कद्दू के डंठल में  ऐसी सुई लगायी जाती हैं जिसका प्रभाव बहुत ही हानिकारक होता हैं |
मिठाईओं में नकली मावा का उपयोग किया जाता हैं|सर्फ और खली जैसे पदार्थों से कृत्रिम दूध को बना के बेचा जाता हैं |
अधिक दूध के लिए बिना ये सोचे गायों को कैल्शियम कि सुई लगवाई जाती हैं ,कि ये दूध छोटे बच्चे भी पियेंगे और इस से उनके स्वास्थ पे बुरा असर पड़ेगा |

एक जीप में पशुओं कि  तरह २०-25 आदमियों को भर के उसका चालक जीप को बिना मुसाफिरों कि जान कि परवाह  किये चलाता हैं ताकि वो जयदा पैसा कम सके|


बहुत से डाक्टर कमिशन के लिए ऐसी दवावों को लिखते हैं जिस से मरीज को कोई लाभ नहीं होता और वो घटिआ किस्म कि होती हैं,इतना ही नहीं बहुत से डाक्टर बिना जरूरत के ही महँगी जाँच भी करवाने के लिए बोलते हैं जिसमे उनका कमीशन होता हैं |

ऐसे न जाने और भी कई  नए नुस्खों को रोज इज़ाद किया जा रहा हैं ताकि कैसे जल्दी से पैसे कमाएं जाएं|
दुनियाँ के किसी देश में शायद ही लोग इतना ज्यादा पैसे के पीछे भाग रहे हैं और पैसा के लिए  इस तरह के अमानविय तरीके अपना रहे हैं |
इतना सब  के वावजूद लोग अपने को भौतिकवादी नहीं मानते उलटे अपने को अध्यात्मवादी कहते हैं.
क्या वाकई में ऐसा हैं ये में आप पे छोडता हूँ ?.