क्या हम वाकई में अध्यात्मिक लोग हैं?
हमारा देश भी अज़ीब हैं|यहाँ जिसे देखो जल्दी से जल्दी अमीर बनने कि जुगत में लगा हुआ हैं |यहाँ आये दिन सुनने में आता हैं कि पैसे के लिए कुछ अलग ही हो रहा हैं|
जैसे कि रातों रात कद्दू को बड़ा करने के लिए कद्दू के डंठल में ऐसी सुई लगायी जाती हैं जिसका प्रभाव बहुत ही हानिकारक होता हैं |
मिठाईओं में नकली मावा का उपयोग किया जाता हैं|सर्फ और खली जैसे पदार्थों से कृत्रिम दूध को बना के बेचा जाता हैं |
अधिक दूध के लिए बिना ये सोचे गायों को कैल्शियम कि सुई लगवाई जाती हैं ,कि ये दूध छोटे बच्चे भी पियेंगे और इस से उनके स्वास्थ पे बुरा असर पड़ेगा |
एक जीप में पशुओं कि तरह २०-25 आदमियों को भर के उसका चालक जीप को बिना मुसाफिरों कि जान कि परवाह किये चलाता हैं ताकि वो जयदा पैसा कम सके|
बहुत से डाक्टर कमिशन के लिए ऐसी दवावों को लिखते हैं जिस से मरीज को कोई लाभ नहीं होता और वो घटिआ किस्म कि होती हैं,इतना ही नहीं बहुत से डाक्टर बिना जरूरत के ही महँगी जाँच भी करवाने के लिए बोलते हैं जिसमे उनका कमीशन होता हैं |
ऐसे न जाने और भी कई नए नुस्खों को रोज इज़ाद किया जा रहा हैं ताकि कैसे जल्दी से पैसे कमाएं जाएं|
दुनियाँ के किसी देश में शायद ही लोग इतना ज्यादा पैसे के पीछे भाग रहे हैं और पैसा के लिए इस तरह के अमानविय तरीके अपना रहे हैं |
इतना सब के वावजूद लोग अपने को भौतिकवादी नहीं मानते उलटे अपने को अध्यात्मवादी कहते हैं.
क्या वाकई में ऐसा हैं ये में आप पे छोडता हूँ ?.
हमारा देश भी अज़ीब हैं|यहाँ जिसे देखो जल्दी से जल्दी अमीर बनने कि जुगत में लगा हुआ हैं |यहाँ आये दिन सुनने में आता हैं कि पैसे के लिए कुछ अलग ही हो रहा हैं|
जैसे कि रातों रात कद्दू को बड़ा करने के लिए कद्दू के डंठल में ऐसी सुई लगायी जाती हैं जिसका प्रभाव बहुत ही हानिकारक होता हैं |
मिठाईओं में नकली मावा का उपयोग किया जाता हैं|सर्फ और खली जैसे पदार्थों से कृत्रिम दूध को बना के बेचा जाता हैं |
अधिक दूध के लिए बिना ये सोचे गायों को कैल्शियम कि सुई लगवाई जाती हैं ,कि ये दूध छोटे बच्चे भी पियेंगे और इस से उनके स्वास्थ पे बुरा असर पड़ेगा |
एक जीप में पशुओं कि तरह २०-25 आदमियों को भर के उसका चालक जीप को बिना मुसाफिरों कि जान कि परवाह किये चलाता हैं ताकि वो जयदा पैसा कम सके|
बहुत से डाक्टर कमिशन के लिए ऐसी दवावों को लिखते हैं जिस से मरीज को कोई लाभ नहीं होता और वो घटिआ किस्म कि होती हैं,इतना ही नहीं बहुत से डाक्टर बिना जरूरत के ही महँगी जाँच भी करवाने के लिए बोलते हैं जिसमे उनका कमीशन होता हैं |
ऐसे न जाने और भी कई नए नुस्खों को रोज इज़ाद किया जा रहा हैं ताकि कैसे जल्दी से पैसे कमाएं जाएं|
दुनियाँ के किसी देश में शायद ही लोग इतना ज्यादा पैसे के पीछे भाग रहे हैं और पैसा के लिए इस तरह के अमानविय तरीके अपना रहे हैं |
इतना सब के वावजूद लोग अपने को भौतिकवादी नहीं मानते उलटे अपने को अध्यात्मवादी कहते हैं.
क्या वाकई में ऐसा हैं ये में आप पे छोडता हूँ ?.
